ईश्वर ओर अपने आप मेँ यकिन रखो ओर कर्म करते जाओँ,
आत्मविश्वास बढ़ाने
का तरीका यह है कि तुम
वह काम करो जिसे तुम
करते हुए डरते हो। इस
प्रकार ज्यों-ज्यों तुम्हें
सफलता मिलती जाएगी
तुम्हारा आत्मविश्वास
बढ़ता जाएगा।जो मनुष्य
आत्मविश्वास से सुरक्षित
है वह उन चिंताओं और
आशंकाओं से मुक्त रहता है
जिनसे दूसरे आदमी दबे
रहते हैं।जिस प्रकार
दूसरों कि सेवा करना
सब
मनुष्य का कर्त्तव्य है,
उसी प्रकार अपने
आत्मसम्मान की हिफाजत
करना भी स्वयं का फर्ज है।
केवल इस शक्ति से वो पाया जा सकता है जो आपको कभी नामुमकिन सा लगता हो...
MKT
Here you can find quotes,philosophy,kavita,gajal,beautiful thought,confidecial poems,shayris , jokes, and many more.
27/05/2012
26/05/2012
RAB RAZI
Insan Mayus isliye hota Hai Kyoki Wo PARMAATMA ko Razi Karne Ke Bajaye
Logo ko Razi Karne me lga Rahta Hai Wo
Ye BhuL Jata Hai Ke
Rab Razi To Sab Razi.
Logo ko Razi Karne me lga Rahta Hai Wo
Ye BhuL Jata Hai Ke
Rab Razi To Sab Razi.
25/05/2012
BOOK OF SUCCESS
सफलता का पथ दिखाने
वाली महत्वपूर्ण
पुस्तकें
जिन्होने मुझे प्रेरित किया
सफलता सम्बन्धि साहित्य
आज बाजार में बहुत आ
गये हैं। यह साहित्य
आपको को उस योग्य
बनाने में मदद करता हैं । मैं
स्वयं ऐसी साहित्यिक किताबे विगत
कुछ वर्षो से
खोजता रहा हूँ। इस क्रम
में जो प्रेरित
करने ,हिम्मत बढाने व
सक्षम बनाने
वाली व्यावहारिक
पुस्तके मुझे
मिली इनकी सूची दे
रहा हूँ।
'आपकी जीत'
"द सिक्रेट- रान्डाबर्न"
APJ Abdul Kalam :
Wings of Fire
Dale Carnegi : How to
Win Friends &
Influence People
:How to Stop Worry
and Start Living
Deepak Chopra : The
Seven Spiritual Laws
of Success
Kenneth Blanchard : The
One Minute Manager
and
Spencer Johnson
Napolean Hill : Think
and Grow Rich
Normen V. Peale : The
Power of Positive
Thinking
Stephen R. Covey : The
7 Habits of Highly
Effective People
Zig Ziglar : See You at
The Top
J. Krishnamurti : The
First And Last
Freedom
Osho : Meditation The
First And Last
Freedom
Joshpeh Murphy : The
Power of Your
Subconscious Mind
Raj Bapna : Mind Power
Study Technique
Mind Power Research
Institute, Mind
Chambers,
Win Wenger :
सफलता का पथ दिखाने
वाली महत्वपूर्ण
पुस्तकें
मुझे प्रेरित करने
वाली पुस्तकें
सफलता सम्बन्धि साहित्य
आज बाजार में बहुत आ
गया हैं। यह साहित्य
आपको को उस योग्य
बनाने में मदद करता हैं । मैं
स्वयं ऐसा साहित्य विगत
35 वर्षो से
खोजता रहा हूँ। इस क्रम
में जो प्रेरित
करने ,हिम्मत बढाने व
सक्षम बनाने
वाली व्यावहारिक
पुस्तके मुझे
मिली इनकी सूची दे
रहा हूँ।
APJ Abdul Kalam :
Wings of Fire
Dale Carnegi : How to
Win Friends &
Influence People
:How to Stop Worry
and Start Living
Deepak Chopra : The
Seven Spiritual Laws
of Success
Kenneth Blanchard : The
One Minute Manager
and
Spencer Johnson
Napolean Hill : Think
and Grow Rich
Normen V. Peale : The
Power of Positive
Thinking
Stephen R. Covey : The
7 Habits of Highly
Effective People
Zig Ziglar : See You at
The Top
J. Krishnamurti : The
First And Last
Freedom
कृष्णामूर्ति फाउण्डेशन
इण्डिया, राजघाट
फोर्ट, वाराणसी
Osho : Meditation The
First And Last
Freedom
रेबेल बुक ओशों कम्यून, पूणे
उपरोक्त पुस्तकांे के
हिन्दीअनुवाद उपलब्धहै।
Anthony Robbins :
Awaken the Giant
Within
:Unlimited Power
Simon & Schuster Inc.
1230 Avenue of the
Americas, New York.
Joshpeh Murphy : The
Power of Your
Subconscious Mind
Bantam Books, USA.
Raj Bapna : Mind Power
Study Technique
Mind Power Research
Institute, Mind
Chambers, Udaipur
Win Wenger : The
Einstein Factor
Prima Publishing,
California.
वाली महत्वपूर्ण
पुस्तकें
जिन्होने मुझे प्रेरित किया
सफलता सम्बन्धि साहित्य
आज बाजार में बहुत आ
गये हैं। यह साहित्य
आपको को उस योग्य
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खोजता रहा हूँ। इस क्रम
में जो प्रेरित
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रहा हूँ।
'आपकी जीत'
"द सिक्रेट- रान्डाबर्न"
APJ Abdul Kalam :
Wings of Fire
Dale Carnegi : How to
Win Friends &
Influence People
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Deepak Chopra : The
Seven Spiritual Laws
of Success
Kenneth Blanchard : The
One Minute Manager
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Spencer Johnson
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Within
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California.
23/05/2012
WORK OF GOD-
रेत अगर मुट्ठी से फिसलती है
तो उसका भी एक मकसद
होता है...
'ईश्वर' उस
मुट्ठी को इसलिए खाली कराता है
क्योंकि वो वहां आसमान
को उतारने के लिए जगह
बनाना चाहता है...
हर कोई
चाहता है कि... इक मुट्ठी आसमान हो... ओर दुसरी मुटठी मेँ तारे हो क्योकि आसमान सफलता है ओर तारे अपनी मंजिल!
पर ये सब कर्म , लगन ओर विश्वास से मिलता है MKT
तो उसका भी एक मकसद
होता है...
'ईश्वर' उस
मुट्ठी को इसलिए खाली कराता है
क्योंकि वो वहां आसमान
को उतारने के लिए जगह
बनाना चाहता है...
हर कोई
चाहता है कि... इक मुट्ठी आसमान हो... ओर दुसरी मुटठी मेँ तारे हो क्योकि आसमान सफलता है ओर तारे अपनी मंजिल!
पर ये सब कर्म , लगन ओर विश्वास से मिलता है MKT
GOD WITH ME-
मेरे जन्म के समय ही ईश्वर ने
कहा था कि वह हमेशा मेरे
साथ रहेगा और सच में वह
मेरे साथ चलता रहा ।
जिस राह पर मैं चल
रहा था , वह बहुत कठिन
था। राह पर
जहाँ तहाँ पत्थर पड़े थे,
काँटे बिछे थे और सिर पर
चिलचिलाती धूप थी,
छायादार
पेड़ों का कहीं भी नामोनिशान नहीं था। ऐसे
पथ पर ठोकर
तो लगना ही थी,
सो लगी
और मैं गिर पड़ा।
मुझे गिरा देखकर ईश्वर
आगे नहीं बढ़ा और न
ही उसने मुझे सहारा देकर
उठाने कि चिंता जताई।
मैं
ही अपने प्रयास से उठ
खड़ा हुआ।
मेरे उठने के बाद
वह फिर मेरे साथ चलने
लगा।
मैं इसी तरह कई
बार गिरा और हर बार
मुझे ही अपने बल पर
उठना पड़ा।
ईश्वर ने
कभी भी मेरी मदद
नहीं की।
मुझे भी इनसे कोई
शिकायत नहीं रही।
परन्तु
मेरी ओर ध्यान देकर
चलने वाला ईश्वर स्वयं एक
पत्थर से टकराकर गिर
पड़ा।
मैंने तुरंत आगे बढ़कर
उसे उठाया।
यह देख
ईश्वर ने मुझसे कहा,
'तुम्हारे गिरने पर मैंने
तो कभी भी आगे बढ़कर
तुम्हें नहीं उठाया। फिर
भी मेरे गिरने पर तुम आगे
बढे।
मैंने तो सोचा की तुम
इस समय मुझे छोड़कर अकेले
आगे चल पड़ोगे। तुमने
ऐसा क्यों नहीं किया?'
मैंने कहा,
'हे
ईश्वर, तुमने मेरी मदद
नहीं की वह
तुम्हारी इच्छा थी।
मैं
स्वयं उठ सकता था,
इसलिए हरबार
उठता गया। मेरे उठने पर
तुम पूर्ववत मेरे साथ चलने
लगे।
मेरे उठने तक तुम रुके
रहे,
यही मेरे लिए
क्या कम था।
ओर जहाँ तक
तुम्हें उठाने का प्रश्न है,
वह मैंने इसलिए
किया क्योंकि मुझे
तो तुम्हारा साथ हर पल चाहिए
था।
सच कहूँ तो जब तुम मेरे
साथ होते
हो तो
मेरी तुम्हारे
प्रति आस्था बनी रहती है
और उसी आस्था के बल ओर विश्वास पर
मैं गिरने पर स्वयं ही उठने
में सफल रहा हूँ। तुम्हारे
साथ के बिना तो मैं एक
कदम भी आगे नहीं रख
पाऊंगा और अगर रख
भी पाया तो मुझे संतोष
नहीं मिलेगा।
एक
बच्चा सामने
माँ को देखकर ही कदम आगे
रखकर चलना सीखता है।
परन्तु इसके लिए उसे
सारी शक्ति सामने
बैठी माँ से ही मिलती है।'
'पर'
बच्चे के
गिरने पर माँ तो तुरंत आगे
बढ़कर उसे उठती है। मैंने
तो ऐसा कभी नहीं किया,'
ईश्वर ने कहा।
मैंने कहा,
'यदि तुम ऐसा करते होते
तो तुममें और माँ में फर्क
ही क्या रह जाता फिर।
कहा था कि वह हमेशा मेरे
साथ रहेगा और सच में वह
मेरे साथ चलता रहा ।
जिस राह पर मैं चल
रहा था , वह बहुत कठिन
था। राह पर
जहाँ तहाँ पत्थर पड़े थे,
काँटे बिछे थे और सिर पर
चिलचिलाती धूप थी,
छायादार
पेड़ों का कहीं भी नामोनिशान नहीं था। ऐसे
पथ पर ठोकर
तो लगना ही थी,
सो लगी
और मैं गिर पड़ा।
मुझे गिरा देखकर ईश्वर
आगे नहीं बढ़ा और न
ही उसने मुझे सहारा देकर
उठाने कि चिंता जताई।
मैं
ही अपने प्रयास से उठ
खड़ा हुआ।
मेरे उठने के बाद
वह फिर मेरे साथ चलने
लगा।
मैं इसी तरह कई
बार गिरा और हर बार
मुझे ही अपने बल पर
उठना पड़ा।
ईश्वर ने
कभी भी मेरी मदद
नहीं की।
मुझे भी इनसे कोई
शिकायत नहीं रही।
परन्तु
मेरी ओर ध्यान देकर
चलने वाला ईश्वर स्वयं एक
पत्थर से टकराकर गिर
पड़ा।
मैंने तुरंत आगे बढ़कर
उसे उठाया।
यह देख
ईश्वर ने मुझसे कहा,
'तुम्हारे गिरने पर मैंने
तो कभी भी आगे बढ़कर
तुम्हें नहीं उठाया। फिर
भी मेरे गिरने पर तुम आगे
बढे।
मैंने तो सोचा की तुम
इस समय मुझे छोड़कर अकेले
आगे चल पड़ोगे। तुमने
ऐसा क्यों नहीं किया?'
मैंने कहा,
'हे
ईश्वर, तुमने मेरी मदद
नहीं की वह
तुम्हारी इच्छा थी।
मैं
स्वयं उठ सकता था,
इसलिए हरबार
उठता गया। मेरे उठने पर
तुम पूर्ववत मेरे साथ चलने
लगे।
मेरे उठने तक तुम रुके
रहे,
यही मेरे लिए
क्या कम था।
ओर जहाँ तक
तुम्हें उठाने का प्रश्न है,
वह मैंने इसलिए
किया क्योंकि मुझे
तो तुम्हारा साथ हर पल चाहिए
था।
सच कहूँ तो जब तुम मेरे
साथ होते
हो तो
मेरी तुम्हारे
प्रति आस्था बनी रहती है
और उसी आस्था के बल ओर विश्वास पर
मैं गिरने पर स्वयं ही उठने
में सफल रहा हूँ। तुम्हारे
साथ के बिना तो मैं एक
कदम भी आगे नहीं रख
पाऊंगा और अगर रख
भी पाया तो मुझे संतोष
नहीं मिलेगा।
एक
बच्चा सामने
माँ को देखकर ही कदम आगे
रखकर चलना सीखता है।
परन्तु इसके लिए उसे
सारी शक्ति सामने
बैठी माँ से ही मिलती है।'
'पर'
बच्चे के
गिरने पर माँ तो तुरंत आगे
बढ़कर उसे उठती है। मैंने
तो ऐसा कभी नहीं किया,'
ईश्वर ने कहा।
मैंने कहा,
'यदि तुम ऐसा करते होते
तो तुममें और माँ में फर्क
ही क्या रह जाता फिर।
22/05/2012
HEART FEELING STORY
.
एक छोटा सा लड़का जिस
की उम्र कोई 6 या 7 साल
थी. एक खिलोने की दूकान
पर खड़ा दुकानदार से कुछ
बात कर रहा था,
दुकानदार ने न जाने उससे
क्या कहा की वो वह से
थोडा सा दूर हट गया और
वहां से खड़े खड़े
वो कभी दुकान पर
रखी एक सुन्दर
सी गुडिया को देखता और
कभी अपनी जेब में हाथ
डालता. वो फिर आँख बंद
करके कुछ सोचता और फिर
दुबारा गुडिया को देखने
और अपनी जेब टटोलने
का क्रम दुहराने लगता.
.
वही कुछ दूर पर खड़ा एक
आदमी बहुत देर से
उसकी और देख रहा था.
वो आदमी जैसे ही आगे
को बढ़ा वो बच्चा दुकानद
ार के पास गया और कुछ
बोला फिर दुकानदार
की आवाज सुने
पड़ी की नहीं तुम ये
गुडिया नहीं खरीद सकते
क्योकि तुम्हारे पास
जो पैसे है वो काफी कम है.
.
वो बच्चा उस
आदमी की और मुड़ा और
उसने उस आदमी से
पूछा अंकल
क्या आपको लगता है
की मेरे पास वास्तव में कम
पैसे है. उस आदमी ने पैसे
गिने और बोला हां बेटा ये
वास्तव में कम है. तुम इतने
पैसो से
वो गुडिया नहीं खरीद
सकते. उस लड़के ने आह
भरी और फिर उदास मन से
उस गुडिया को घूरने लगा.
अब उस आदमी ने उस लड़के
से पूछा ” तुम ये
गुडिया ही क्यों लेना चाह
ते हो”. लड़के ने उत्तर
दिया ये
गुडिया मेरी बहिन
को बहुत पसंद है. और में ये
गुडिया उसको उसके
जन्मदिन पर गिफ्ट
करना चाहता हु. मुझे ये
गुडिया अपनी माँ को देनी
है, ताकि वो ये
गुडिया मेरे बहिन को दे दें
जब वो उसके पास जाये.
.
उस आदमी ने
पूछा कहा रहती है
तुम्हारी बहिन.
छोटा लड़का बोला मेरे
बहिन भगवान के पास
चली गयी है. और
पापा कहते है
जल्दी ही मेरी माँ भी उस
से मिलने भगवान के पास
जाने वाली है. और मै
चाहता हु की मेरी माँ जब
भगवान के पास जाये
तो वो ये
गुडिया मेरी बहीन के
लिए ले जाये. उस
आदमी की आखों से आंसू
छलकने लगे थे. पर
लड़का अभी बोल
ही रहा था.
.
वो कह रहा था की मै
पापा से
कहूँगा की वो माँ को कहे
की कुछ और तक दिन
भगवान के पास न जाये.
ताकि मै कुछ और पैसे
जमा कर लूँ और ये
गुडिया ले कर
अपनी बहिन के लिए भेज
दू. फिर उसने अपनी एक
फोटो जेब से निकली इस
फोटो में वो हँसता हुआ
बहुत सुन्दर दिख रहा था.
.
फोटो दिखाकर
वो बोला ये फोटो भी मै
अपनी माँ को दे दूंगा,
ताकि वो इसे
भी मेरी बहिन को दे
ताकि वो हमेशा मुझे याद
रख सके…………. मै जानता हु
की मेरी माँ इतनी जल्दी
मुझे छोड़ कर मेरी बहिन से
मिलने नहीं जाएगी.
लेकिन पापा कहते है
की वो 2 -1 दिन में
चली जाएगी.
उस आदमी ने झट से
अपनी जेब से पर्स
निकला और उसमे से एक
100 रुपए का नोट निकल
कर कहा……….. लाओ अपने
पैसे दो मै दुकानदार से
कहता हु शायद वो इतने
पैसे में ही दे दे. और उसने उस
लड़के के सामने रुपये गिनने
का अभिनय किया और
बोला…….. अरे तुम्हारे
पास तो उस
गुडिया की कीमत से
अधिक पैसे है. उस लड़के ने
आकाश की और देख कर
कहा भगवान
तेरा धन्यवाद….
.
अब वो लड़का उस आदमी से
बोला कल रात को मैंने
भगवान से कहा था की हे
भगवान मुझे इतने पैसे दे
देना की मै वो गुडिया ले
सकू. वैसे मै एक सफ़ेद गुलाब
भी लेना चाहता था किन्तु
भगवान से
ज्यादा मांगना मुझे ठीक
नहीं लगा. पर उसने मुझे
खुद ही इतना दे
दिया की मै गुडिया और
गुलाब दोनों ले सकता हु.
मेरी माँ को सफ़ेद गुलाब
बहुत पसंद है.
.
उस आदमी की आँखों से आंसू
नीचे गिरने लगे. फिर उसने
उन्हें संभलते हुए उस लड़के से
कहा ठीक है बच्चे
अपना ख्याल रखना. और
वो वहा से चला गया.
रस्ते भर उस आदमी के
दिमाग मै
वो लड़का छाया रहा.
फिर अचानक उसे 2 दिन
पहले अख़बार मै छपी खबर
याद आयी जिस में एक
हादसा छपा था की किसी
युवक ने शराब के नशे में एक
दूसरी गाड़ी को टक्कर
मार दी.
गाड़ी में सवार एक
लडकी की मौके पर
ही मौत हो गयी और
महिला गंभीर रूप से
घायल थी. अब उसके मन में
सवाल आया कही ये उस
लड़के की माँ और बहिन
ही तो नहीं थे.
अगले दिन अख़बार में खबर
आयी की उस
महिला की भी मौत
हो गयी है. वो आदमी उस
महिला के घर सफ़ेद गुलाब
के फूल ले कर गया. उस
महिला की लाश आँगन में
रखी थी. उसकी छाती पर
वो सुन्दर
सी गुडिया थी जो उस
लड़के ने ली थी और उस
महिला के एक हाथ में उस
लड़के की वो फोटो थी और
दुसरे में वो सफ़ेद गुलाब
का फूल था.
.
वो आदमी रोता हुआ
बाहर निकला. उसके मन मै
एक ही बात थी एक शराब
के नशे मै चूर एक युवक के
कारन एक
छोटा सा बच्चा अपनी माँ
और बहिन से दूर
हो गया जिन्हें वो बहुत
प्यार करता था.
.
इस कहानी को पढ़कर और
इस समय लिखते हुए भी मेरे
आँखों मै भी पानी है. और
शायद आपकी आँखों में भी आ
जाय
एक छोटा सा लड़का जिस
की उम्र कोई 6 या 7 साल
थी. एक खिलोने की दूकान
पर खड़ा दुकानदार से कुछ
बात कर रहा था,
दुकानदार ने न जाने उससे
क्या कहा की वो वह से
थोडा सा दूर हट गया और
वहां से खड़े खड़े
वो कभी दुकान पर
रखी एक सुन्दर
सी गुडिया को देखता और
कभी अपनी जेब में हाथ
डालता. वो फिर आँख बंद
करके कुछ सोचता और फिर
दुबारा गुडिया को देखने
और अपनी जेब टटोलने
का क्रम दुहराने लगता.
.
वही कुछ दूर पर खड़ा एक
आदमी बहुत देर से
उसकी और देख रहा था.
वो आदमी जैसे ही आगे
को बढ़ा वो बच्चा दुकानद
ार के पास गया और कुछ
बोला फिर दुकानदार
की आवाज सुने
पड़ी की नहीं तुम ये
गुडिया नहीं खरीद सकते
क्योकि तुम्हारे पास
जो पैसे है वो काफी कम है.
.
वो बच्चा उस
आदमी की और मुड़ा और
उसने उस आदमी से
पूछा अंकल
क्या आपको लगता है
की मेरे पास वास्तव में कम
पैसे है. उस आदमी ने पैसे
गिने और बोला हां बेटा ये
वास्तव में कम है. तुम इतने
पैसो से
वो गुडिया नहीं खरीद
सकते. उस लड़के ने आह
भरी और फिर उदास मन से
उस गुडिया को घूरने लगा.
अब उस आदमी ने उस लड़के
से पूछा ” तुम ये
गुडिया ही क्यों लेना चाह
ते हो”. लड़के ने उत्तर
दिया ये
गुडिया मेरी बहिन
को बहुत पसंद है. और में ये
गुडिया उसको उसके
जन्मदिन पर गिफ्ट
करना चाहता हु. मुझे ये
गुडिया अपनी माँ को देनी
है, ताकि वो ये
गुडिया मेरे बहिन को दे दें
जब वो उसके पास जाये.
.
उस आदमी ने
पूछा कहा रहती है
तुम्हारी बहिन.
छोटा लड़का बोला मेरे
बहिन भगवान के पास
चली गयी है. और
पापा कहते है
जल्दी ही मेरी माँ भी उस
से मिलने भगवान के पास
जाने वाली है. और मै
चाहता हु की मेरी माँ जब
भगवान के पास जाये
तो वो ये
गुडिया मेरी बहीन के
लिए ले जाये. उस
आदमी की आखों से आंसू
छलकने लगे थे. पर
लड़का अभी बोल
ही रहा था.
.
वो कह रहा था की मै
पापा से
कहूँगा की वो माँ को कहे
की कुछ और तक दिन
भगवान के पास न जाये.
ताकि मै कुछ और पैसे
जमा कर लूँ और ये
गुडिया ले कर
अपनी बहिन के लिए भेज
दू. फिर उसने अपनी एक
फोटो जेब से निकली इस
फोटो में वो हँसता हुआ
बहुत सुन्दर दिख रहा था.
.
फोटो दिखाकर
वो बोला ये फोटो भी मै
अपनी माँ को दे दूंगा,
ताकि वो इसे
भी मेरी बहिन को दे
ताकि वो हमेशा मुझे याद
रख सके…………. मै जानता हु
की मेरी माँ इतनी जल्दी
मुझे छोड़ कर मेरी बहिन से
मिलने नहीं जाएगी.
लेकिन पापा कहते है
की वो 2 -1 दिन में
चली जाएगी.
उस आदमी ने झट से
अपनी जेब से पर्स
निकला और उसमे से एक
100 रुपए का नोट निकल
कर कहा……….. लाओ अपने
पैसे दो मै दुकानदार से
कहता हु शायद वो इतने
पैसे में ही दे दे. और उसने उस
लड़के के सामने रुपये गिनने
का अभिनय किया और
बोला…….. अरे तुम्हारे
पास तो उस
गुडिया की कीमत से
अधिक पैसे है. उस लड़के ने
आकाश की और देख कर
कहा भगवान
तेरा धन्यवाद….
.
अब वो लड़का उस आदमी से
बोला कल रात को मैंने
भगवान से कहा था की हे
भगवान मुझे इतने पैसे दे
देना की मै वो गुडिया ले
सकू. वैसे मै एक सफ़ेद गुलाब
भी लेना चाहता था किन्तु
भगवान से
ज्यादा मांगना मुझे ठीक
नहीं लगा. पर उसने मुझे
खुद ही इतना दे
दिया की मै गुडिया और
गुलाब दोनों ले सकता हु.
मेरी माँ को सफ़ेद गुलाब
बहुत पसंद है.
.
उस आदमी की आँखों से आंसू
नीचे गिरने लगे. फिर उसने
उन्हें संभलते हुए उस लड़के से
कहा ठीक है बच्चे
अपना ख्याल रखना. और
वो वहा से चला गया.
रस्ते भर उस आदमी के
दिमाग मै
वो लड़का छाया रहा.
फिर अचानक उसे 2 दिन
पहले अख़बार मै छपी खबर
याद आयी जिस में एक
हादसा छपा था की किसी
युवक ने शराब के नशे में एक
दूसरी गाड़ी को टक्कर
मार दी.
गाड़ी में सवार एक
लडकी की मौके पर
ही मौत हो गयी और
महिला गंभीर रूप से
घायल थी. अब उसके मन में
सवाल आया कही ये उस
लड़के की माँ और बहिन
ही तो नहीं थे.
अगले दिन अख़बार में खबर
आयी की उस
महिला की भी मौत
हो गयी है. वो आदमी उस
महिला के घर सफ़ेद गुलाब
के फूल ले कर गया. उस
महिला की लाश आँगन में
रखी थी. उसकी छाती पर
वो सुन्दर
सी गुडिया थी जो उस
लड़के ने ली थी और उस
महिला के एक हाथ में उस
लड़के की वो फोटो थी और
दुसरे में वो सफ़ेद गुलाब
का फूल था.
.
वो आदमी रोता हुआ
बाहर निकला. उसके मन मै
एक ही बात थी एक शराब
के नशे मै चूर एक युवक के
कारन एक
छोटा सा बच्चा अपनी माँ
और बहिन से दूर
हो गया जिन्हें वो बहुत
प्यार करता था.
.
इस कहानी को पढ़कर और
इस समय लिखते हुए भी मेरे
आँखों मै भी पानी है. और
शायद आपकी आँखों में भी आ
जाय
A BEST STORY
एक लडकी जन्म से
नेत्रहीन थी और इस
कारण वह स्वयं से नफरत
करती थी। वह
किसी को भी पसंद
नहीं करती थी, सिवाय
एक लड़के के
जो उसका दोस्त था। वह
उससे बहुत प्यार
करता था और उसकी हर
तरह से देखभाल करता था।
एक दिन लड़की ने लड़के से
कहा – “यदि मैं कभी यह
दुनिया देखने लायक हुई
तो मैं तुमसे शादी कर
लूंगी”।
एक दिन उसका किस्मत बदला किसी ने उस
लड़की को अपने नेत्र दान
कर दिए। जब
लड़की की आंखों से
पट्टियाँ उतारी गयीं तो
वह सब कुछ देख सकती थी।
उसने लड़के को भी देखा।
लड़के ने उससे पूछा – “अब
तुम सब कुछ देख सकती हो,जियो अपनी जिन्दगी अब
जान क्या तुम मुझसे
शादी करोगी?”
लड़की को यह देखकर
सदमा पहुँचा की लड़का
अँधा था। लड़की को इस
बात की उम्मीद नहीं थी।
उसने सोचा कि उसे
ज़िन्दगी भर एक अंधे लड़के
के साथ रहना पड़ेगा, और
उसने शादी करने से इंकार
कर दिया।
लड़का अपने दिल मेँ अफसोस ओर अपनी आँखों में आंसू
लिए वहां से चला गया।
कुछ दिन बाद उसने
लड़की को एक पत्र लिखा:
“मेरी प्यारी,
अपनी आँखों को बहुत
संभाल कर रखना,
क्योंकि वे मेरी ऑंखें हैं”।
नेत्रहीन थी और इस
कारण वह स्वयं से नफरत
करती थी। वह
किसी को भी पसंद
नहीं करती थी, सिवाय
एक लड़के के
जो उसका दोस्त था। वह
उससे बहुत प्यार
करता था और उसकी हर
तरह से देखभाल करता था।
एक दिन लड़की ने लड़के से
कहा – “यदि मैं कभी यह
दुनिया देखने लायक हुई
तो मैं तुमसे शादी कर
लूंगी”।
एक दिन उसका किस्मत बदला किसी ने उस
लड़की को अपने नेत्र दान
कर दिए। जब
लड़की की आंखों से
पट्टियाँ उतारी गयीं तो
वह सब कुछ देख सकती थी।
उसने लड़के को भी देखा।
लड़के ने उससे पूछा – “अब
तुम सब कुछ देख सकती हो,जियो अपनी जिन्दगी अब
जान क्या तुम मुझसे
शादी करोगी?”
लड़की को यह देखकर
सदमा पहुँचा की लड़का
अँधा था। लड़की को इस
बात की उम्मीद नहीं थी।
उसने सोचा कि उसे
ज़िन्दगी भर एक अंधे लड़के
के साथ रहना पड़ेगा, और
उसने शादी करने से इंकार
कर दिया।
लड़का अपने दिल मेँ अफसोस ओर अपनी आँखों में आंसू
लिए वहां से चला गया।
कुछ दिन बाद उसने
लड़की को एक पत्र लिखा:
“मेरी प्यारी,
अपनी आँखों को बहुत
संभाल कर रखना,
क्योंकि वे मेरी ऑंखें हैं”।
KARM KARO-
एक गांव में दो दोस्त
रहते थे। एक का नाम
मोहन था और दूसरे
का सोहन। मोहन
मेहनती था। वह
हमेशा अपने खेतों में
काम करता।
खाली समय में भी वह
कुछ न कुछ
करता ही रहता था।
जबकि सोहन
आलसी था। वह भाग्य
पर अधिक
भरोसा करता था।
उसने खेतों में काम करने
के लिए नौकर रखे थें।
वह सोचता था जितना
किस्मत में लिखा है
उतना तो मिल
ही जाएगा। वह कभी-
कभी ही खेतों में
जाता था। पूरा दिन
घर में रहता या फिर
इधर-उधर घुमते रहता।
वह मोहन से
भी यही कहता था कि
खेतों में काम करने के
लिए नौकर रख ले और
खुद आराम करो। भाग्य
में जो लिखा है
उतना ही मिलेगा।
लेकिन मोहन
हमेशा यही कहता कि
कर्म भाग्य से भी ऊपर
है। काम करेंगे
तो उसका फल अवश्य
ही मिलेगा।
सोहन कई-कई
दिनों तक खेत पर
नहीं जाता तो नौकर
भी खेतों का ध्यान
ठीक से नहीं रखते और
अपनी मनमर्जी से काम
करते। न तो ठीक से
बुआई करते और न
ही सिंचाई।
जबकि मोहन दिन-
रात खेतों में काम
करता। थोड़े
दिनों बाद जब फसल
कटने का समय आया तब
सोहन खेत पर गया।
उसने
वहां देखा कि समय पर
सिंचाई न होने के
कारण फसल मुरझा गई
है। उसने अपन
नौकरों को बहुत
डांटा लेकिन तब तक
बहुत देर हो चुकी थी।
वहीं दूसरी ओर मोहन
के खेत में शानदार फसल
लहलहा रही थी।
यह देखकर सोहन
को मोहन की बात
याद आने लगी। वह
मोहन के पास गया और
उससे माफी मांगी और
वादा किया कि वह
आगे से भाग्य पर
निर्भर नहीं रहेगा।
क्योंकि भाग्य
भी उन्हीं लोगों का
साथ देता है जो कर्म
करते हैं।
रहते थे। एक का नाम
मोहन था और दूसरे
का सोहन। मोहन
मेहनती था। वह
हमेशा अपने खेतों में
काम करता।
खाली समय में भी वह
कुछ न कुछ
करता ही रहता था।
जबकि सोहन
आलसी था। वह भाग्य
पर अधिक
भरोसा करता था।
उसने खेतों में काम करने
के लिए नौकर रखे थें।
वह सोचता था जितना
किस्मत में लिखा है
उतना तो मिल
ही जाएगा। वह कभी-
कभी ही खेतों में
जाता था। पूरा दिन
घर में रहता या फिर
इधर-उधर घुमते रहता।
वह मोहन से
भी यही कहता था कि
खेतों में काम करने के
लिए नौकर रख ले और
खुद आराम करो। भाग्य
में जो लिखा है
उतना ही मिलेगा।
लेकिन मोहन
हमेशा यही कहता कि
कर्म भाग्य से भी ऊपर
है। काम करेंगे
तो उसका फल अवश्य
ही मिलेगा।
सोहन कई-कई
दिनों तक खेत पर
नहीं जाता तो नौकर
भी खेतों का ध्यान
ठीक से नहीं रखते और
अपनी मनमर्जी से काम
करते। न तो ठीक से
बुआई करते और न
ही सिंचाई।
जबकि मोहन दिन-
रात खेतों में काम
करता। थोड़े
दिनों बाद जब फसल
कटने का समय आया तब
सोहन खेत पर गया।
उसने
वहां देखा कि समय पर
सिंचाई न होने के
कारण फसल मुरझा गई
है। उसने अपन
नौकरों को बहुत
डांटा लेकिन तब तक
बहुत देर हो चुकी थी।
वहीं दूसरी ओर मोहन
के खेत में शानदार फसल
लहलहा रही थी।
यह देखकर सोहन
को मोहन की बात
याद आने लगी। वह
मोहन के पास गया और
उससे माफी मांगी और
वादा किया कि वह
आगे से भाग्य पर
निर्भर नहीं रहेगा।
क्योंकि भाग्य
भी उन्हीं लोगों का
साथ देता है जो कर्म
करते हैं।
TRUE FACT-
.....
Jiske sath aap dil khol ke hans skte ho uske sath aap
1 din reh skte ho.....
Lekin
Jiske sath aap dil khol ke ro skte ho uske sath aap
puri zindagi bita sakte ho...
Jiske sath aap dil khol ke hans skte ho uske sath aap
1 din reh skte ho.....
Lekin
Jiske sath aap dil khol ke ro skte ho uske sath aap
puri zindagi bita sakte ho...
EK POSITIVE SOCH-
एक बुद्धिमान
व्यक्ति ,जो लिखने
का शौकीन था ,लिखने
के लिए समुद्र के
किनारे जा कर बैठ
जाता था और फिर उसे
प्रेरणायें प्राप्त
होती थीं और
उसकी लेखनी चल
निकलती थी ।
लेकिन ,लिखने के लिए
बैठने से पहले वह समुद्र
के तट पर कुछ क्षण
टहलता अवश्य था । एक
दिन वह समुद्र के तट
पर टहल
रहा था कि तभी उसे
एक व्यक्ति तट से
उठा कर कुछ समुद्र में
फेंकता हुआ दिखा ।जब
उसने निकट जाकर
देखा तो पाया कि वह
व्यक्ति समुद्र के तट से
छोटी -
छोटी मछलियाँ एक-
एक करके
उठा रहा था और
समुद्र में फेंक रहा था ।
और ध्यान से अवलोकन
करने पर उसने
पाया कि समुद्र तट
पर
तो लाखों कि तादात
में छोटी -
छोटी मछलियाँ पडी
थीं जो कि थोडी ही
देर में दम तोड़ने
वाली थीं ।अंततः उससे
न रहा गया और उस
बुद्धिमान मनुष्य ने उस
व्यक्ति से पूछ
ही लिया ,"नमस्ते
भाई ! तट पर
तो लाखों मछलियाँ हैं ।
इस प्रकार तुम चंद
मछलियाँ पानी में फ़ेंक
कर मरने
वाली मछलियों का
अंतर कितना कम कर
पाओगे ?इस पर वह
व्यक्ति जो छोटी -
छोटी मछलियों को एक
-एक करके समुद्र में फेंक
रहा था ,बोला,"देखिए
!सूर्य निकल चुका है और
समुद्र की लहरें अब
शांत होकर वापस होने
की तैयारी में हैं । ऐसे
में ,मैं तट पर
बची सारी मछलियों
को तो जीवन दान
नहीं दे पाऊँगा । " और
फिर वह झुका और एक
और मछली को समुद्र में
फेंकते हुए
बोला ,"किन्तु , इस
मछली के जीवन में
तो मैंने अंतर
ला ही दिया ,और
यही मुझे बहुत संतोष
प्रदान कर रहा है ।
"इसी प्रकार ईश्वर ने
आप सब में भी यह
योग्यता दी है कि आप
एक छोटे से प्रयास से
रोज़ किसी न किसी के
जीवन में
'छोटा सा अंतर'
ला सकते हैं ।
जैसे ,किसी भूखे पशु
या मनुष्य को भोजन
देना , किसी ज़रूरतमंद
की निःस्वार्थ
सहायता करना
इत्यादि । आप
अपनी किस योग्यता से
इस समाज को , इस
संसार को या किसी एक इंसान को क्या दे रहे
हैं ,क्या दे सकते
हैं ,आपको यही
आत्मनिरीक्षण
करना है और फिर
अपनी उस
योग्यता को पहचान
कर रोज़ किसी न
किसी के मुख पर
मुस्कान लाने
का प्रयास करना है ।
और विश्वास
जानिए ,ऐसा करने से
अंततः सबसे अधिक
लाभान्वित आप
ही होंगे । ऐसा करने से
सबसे अधिक अंतर
आपको अपने भीतर
महसूस होगा ।
ऐसा करने से सबसे
अधिक अंतर आपके
ही जीवन में पड़ेगा!
व्यक्ति ,जो लिखने
का शौकीन था ,लिखने
के लिए समुद्र के
किनारे जा कर बैठ
जाता था और फिर उसे
प्रेरणायें प्राप्त
होती थीं और
उसकी लेखनी चल
निकलती थी ।
लेकिन ,लिखने के लिए
बैठने से पहले वह समुद्र
के तट पर कुछ क्षण
टहलता अवश्य था । एक
दिन वह समुद्र के तट
पर टहल
रहा था कि तभी उसे
एक व्यक्ति तट से
उठा कर कुछ समुद्र में
फेंकता हुआ दिखा ।जब
उसने निकट जाकर
देखा तो पाया कि वह
व्यक्ति समुद्र के तट से
छोटी -
छोटी मछलियाँ एक-
एक करके
उठा रहा था और
समुद्र में फेंक रहा था ।
और ध्यान से अवलोकन
करने पर उसने
पाया कि समुद्र तट
पर
तो लाखों कि तादात
में छोटी -
छोटी मछलियाँ पडी
थीं जो कि थोडी ही
देर में दम तोड़ने
वाली थीं ।अंततः उससे
न रहा गया और उस
बुद्धिमान मनुष्य ने उस
व्यक्ति से पूछ
ही लिया ,"नमस्ते
भाई ! तट पर
तो लाखों मछलियाँ हैं ।
इस प्रकार तुम चंद
मछलियाँ पानी में फ़ेंक
कर मरने
वाली मछलियों का
अंतर कितना कम कर
पाओगे ?इस पर वह
व्यक्ति जो छोटी -
छोटी मछलियों को एक
-एक करके समुद्र में फेंक
रहा था ,बोला,"देखिए
!सूर्य निकल चुका है और
समुद्र की लहरें अब
शांत होकर वापस होने
की तैयारी में हैं । ऐसे
में ,मैं तट पर
बची सारी मछलियों
को तो जीवन दान
नहीं दे पाऊँगा । " और
फिर वह झुका और एक
और मछली को समुद्र में
फेंकते हुए
बोला ,"किन्तु , इस
मछली के जीवन में
तो मैंने अंतर
ला ही दिया ,और
यही मुझे बहुत संतोष
प्रदान कर रहा है ।
"इसी प्रकार ईश्वर ने
आप सब में भी यह
योग्यता दी है कि आप
एक छोटे से प्रयास से
रोज़ किसी न किसी के
जीवन में
'छोटा सा अंतर'
ला सकते हैं ।
जैसे ,किसी भूखे पशु
या मनुष्य को भोजन
देना , किसी ज़रूरतमंद
की निःस्वार्थ
सहायता करना
इत्यादि । आप
अपनी किस योग्यता से
इस समाज को , इस
संसार को या किसी एक इंसान को क्या दे रहे
हैं ,क्या दे सकते
हैं ,आपको यही
आत्मनिरीक्षण
करना है और फिर
अपनी उस
योग्यता को पहचान
कर रोज़ किसी न
किसी के मुख पर
मुस्कान लाने
का प्रयास करना है ।
और विश्वास
जानिए ,ऐसा करने से
अंततः सबसे अधिक
लाभान्वित आप
ही होंगे । ऐसा करने से
सबसे अधिक अंतर
आपको अपने भीतर
महसूस होगा ।
ऐसा करने से सबसे
अधिक अंतर आपके
ही जीवन में पड़ेगा!
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